हर किसी के बुरे दिन और उदास हफ़्ते आते हैं, और दुख तथा तनाव मन को नीचे खींच सकते हैं। डिप्रेशन एक अहम तरीक़े से अलग है, यह ठहर जाता है, दिन भर लगभग रोज़ कम से कम दो हफ़्ते रहता है, और ज़िंदगी का रंग सोख लेता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार इसमें लगातार उदासी, हर चीज़ में रुचि खोना, नींद-भूख में बड़ा बदलाव, गहरी थकान, ख़ुद को बेकार महसूस करना और गंभीर हालत में जीने का कोई मतलब न लगना शामिल है।
यह किसी को भी, किसी भी उम्र में हो सकता है, और यह ख़राब सेहत का एक बड़ा कारण है, जिसे कहना ज़रूरी है क्योंकि इसे अक्सर कमज़ोरी मान लिया जाता है। US NIMH के अनुसार इसमें दिमाग़ और शरीर के काम में असली बदलाव होते हैं, इसीलिए इसे अकेली इच्छाशक्ति से नहीं हटाया जा सकता, जैसे इच्छाशक्ति से हाई बीपी ठीक नहीं होता।
सबसे ज़रूरी बात यह है कि डिप्रेशन इलाज योग्य है, और ज़्यादातर लोग सही मदद से बेहतर होते हैं। बातचीत थेरेपी के पीछे मज़बूत सबूत हैं, और मध्यम से गंभीर डिप्रेशन में डॉक्टर दवा जोड़ सकते हैं। रिकवरी अक्सर धीरे-धीरे होती है, इसलिए दिनचर्या, लोगों से जुड़ाव और थोड़ी हलचल मायने रखते हैं। पर एक संकेत कभी इंतज़ार नहीं कर सकता: आत्महत्या या ख़ुद को नुकसान के ख़याल में तुरंत मदद चाहिए।
आप क्या कर सकते हैं
- दिनचर्या रखें, लोगों से जुड़े रहें, और थोड़ी हलचल जोड़ें, क्योंकि WHO के अनुसार नियमित गतिविधि मानसिक सेहत सुधारती है।
- "काफ़ी गंभीर" वजह का इंतज़ार न करें; दो हफ़्ते की उदासी मदद लेने की काफ़ी वजह है।
- डॉक्टर या काउंसलर से बात करें; थेरेपी असरदार है, और गंभीर डिप्रेशन में दवा जोड़ी जा सकती है।
- किसी की मदद कर रहे हों तो सुनें, गंभीरता से लें, और उसे इलाज तक पहुंचाएं।
ज़रूरी बात: डिप्रेशन इलाज योग्य है, और मदद मांगना ताक़त है। भारत में Tele-MANAS मुफ़्त सहारा 24x7 देता है, नंबर 14416, और आत्महत्या या ख़ुद को नुकसान के ख़याल में तुरंत मदद लें।