खांसी जो हफ़्तों नहीं जाती, वज़न बिना कोशिश घटना, रात को पसीने से भीगना, और थकान जो नींद से भी नहीं जाती। इन लक्षणों को टालना आसान है, और कई लोग जांच में देर करते हैं इस डर से कि लोग क्या कहेंगे। यह डर समय बर्बाद करता है। टीबी एक बीमारी है, और सही इलाज से रोकी और ठीक की जा सकती है।
टीबी बैक्टीरिया से होती है। यह ज़्यादातर फेफड़ों को प्रभावित करती है और खांसने या छींकने से हवा में फैल सकती है। यह शरीर के दूसरे हिस्सों को भी प्रभावित कर सकती है। जल्दी और पूरा इलाज इसे ख़तरनाक से ठीक होने लायक बना देता है।
लक्षण शुरू में हल्के हो सकते हैं। हफ़्तों की खांसी, बुख़ार, रात का पसीना, वज़न घटना, थकान, सीने में दर्द या ख़ून वाली खांसी। ये दूसरी बीमारियों में भी हो सकते हैं, इसलिए लगातार लक्षणों की जांच ज़रूरी है।
टीबी के हर संक्रमित को बीमारी नहीं होती। कुछ हालात ख़तरा बढ़ाते हैं। WHO शुगर, कुपोषण, एचआईवी, तंबाकू और शराब को इनमें गिनता है। शुगर से जुड़ाव भारत में बहुत मायने रखता है, जहां दोनों आम हैं। शुगर और लगातार खांसी या वज़न घटने वाले को जांच करानी चाहिए।
जांच में बलगम की जांच, छाती का एक्स-रे और डॉक्टर की चुनी दूसरी जांचें हो सकती हैं। इलाज एक तय अवधि तक कई एंटीबायोटिक से होता है। इलाज बीच में छोड़ना ख़तरनाक है और दवा-प्रतिरोधी टीबी की वजह बन सकता है।
परिवार का साथ इलाज आसान बनाता है। याद दिलाना, अस्पताल पहुंचने में मदद, अच्छा खाना और बिना ताने का माहौल सब मायने रखते हैं। शर्म की वजह से लक्षण न छिपाएं।