गले में ख़राश, खांसी और बुख़ार पर कई परिवार एंटीबायोटिक की उम्मीद करते हैं, और बिना उसके लौटना अधूरा लगता है। पर अक्सर यही सही फ़ैसला है, क्योंकि ऐसी ज़्यादातर बीमारियां वायरस से होती हैं।
एंटीबायोटिक बैक्टीरिया के संक्रमण का इलाज हैं और वायरस पर असर नहीं करते, और ज़्यादातर सर्दी तथा कई खांसी-गले की ख़राश वायरस से होती है। वायरस में एंटीबायोटिक जल्दी ठीक नहीं करता, उल्टा दस्त, चकत्ते या एलर्जी दे सकता है।
एंटीबायोटिक प्रतिरोध तब होता है जब कीटाणु बदल जाते हैं और दवाएं बेअसर हो जाती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन एंटीबायोटिक के ग़लत और ज़्यादा इस्तेमाल को इसकी बड़ी वजह बताता है, इसलिए हर बेवजह की खुराक इस साझा संसाधन को कमज़ोर करती है।
सिर्फ़ लक्षणों से कारण साफ़ नहीं होता, इसलिए डॉक्टर जांच या टेस्ट कर सकते हैं, और जब बैक्टीरिया का संक्रमण संभव हो तो एंटीबायोटिक ज़रूरी और जान बचाने वाला हो सकता है। WHO का मार्गदर्शन एंटीबायोटिक से बचना नहीं, बल्कि सही एंटीबायोटिक सही खुराक में सही कारण से देना है।
डॉक्टर एंटीबायोटिक दे तो जैसा कहा वैसा पूरा लें, साझा न करें, और बचे हुए या बिना सलाह न लें। सबसे काम का सवाल पूछें, किन लक्षणों पर दोबारा आऊं, जो बिना एंटीबायोटिक वाली मुलाक़ात को एक सुरक्षित योजना बना देता है।