कुछ लोगों के लिए कोविड बुख़ार उतरने के साथ ख़त्म नहीं हुआ। हफ़्तों बाद भी वे निचुड़े रहते हैं, सीढ़ियों पर सांस फूलती है, और एक सामान्य दिन के बाद अगले दिन थकान की मार पड़ती है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन इसे पोस्ट कोविड-19 स्थिति कहता है, यानी ऐसे लक्षण जो कोविड के बाद बने रहते हैं और किसी और बीमारी से नहीं समझाए जा सकते। इनमें थकान, सांस फूलना, याददाश्त-ध्यान की दिक्कत, नींद बिगड़ना, सूंघने-चखने में बदलाव, दर्द, चक्कर और धड़कन शामिल हैं।
इसका कोई एक टेस्ट नहीं, लक्षण बहुत अलग और समय के साथ बदलते हैं, और ख़ून की कमी, थायरॉइड, दिल की बीमारी, चिंता तथा उदासी से मिलते-जुलते हैं। यही ओवरलैप डॉक्टरी जांच को ज़रूरी बनाता है, क्योंकि डॉक्टर गंभीर दिक्कतें और दूसरे कारण दोनों जांच सकते हैं।
रिकवरी हर इंसान के हिसाब से हो, और एक Lancet समीक्षा तथा अनुभव पेसिंग का समर्थन करते हैं, यानी काम-आराम का संतुलन ताकि बार-बार थकान की मार न पड़े। कुछ को सांस की कसरत, नींद की मदद या काम पर लौटने में मदद चाहिए, और थकान को ज़बरदस्ती धकेलने की पुरानी सलाह उल्टी पड़ सकती है।
लॉन्ग कोविड पर शोध जारी है, और यह क्यों होता है, कौन सा इलाज सबसे अच्छा है और लक्षण कितने रहते हैं, इन पर सवाल बाक़ी हैं। इस अनिश्चितता को मानना ज़रूरी है, और यह किसी अनसिद्ध "इलाज" को बेचने की छूट नहीं। सीने में दर्द, तेज़ सांस फूलना, बेहोशी या लकवे के संकेत तुरंत इलाज मांगते हैं।