कोलेस्ट्रॉल का नाम बदनाम है, फिर भी शरीर को इसकी ज़रूरत है। दिक्कत तब शुरू होती है जब नुकसान वाला कोलेस्ट्रॉल, जिसे अक्सर LDL कहते हैं, सालों तक बहुत ज़्यादा घूमकर नसों की दीवारों में जमता और दिल तथा दिमाग़ की नलियों को सिकोड़ता है। जांच LDL के साथ बचाने वाला HDL और ट्राइग्लिसराइड भी बताती है, और US NHLBI के अनुसार डॉक्टर इन्हें बीपी, शुगर, तंबाकू, उम्र और परिवार के इतिहास के साथ मिलाकर कुल ख़तरा आंकता है।
सबसे ज़रूरी बात यह है कि हाई कोलेस्ट्रॉल का कोई लक्षण नहीं और यह सालों चुपचाप नुकसान करता है, इसलिए हाई बीपी की तरह पहला संकेत कभी-कभी सीधे दिल का दौरा या लकवा होता है। WHO के अनुसार दिल की बीमारी दुनिया में मौत का सबसे बड़ा कारण) है, इसीलिए जांच मायने रखती है।
अब वह ईमानदार बात जो "बस टहल लो" वाले भ्रम को तोड़ती है। खान-पान और कसरत सबकी मदद करते हैं, पर जब कोलेस्ट्रॉल या दिल का ख़तरा ज़्यादा हो तो ये अक्सर अकेले काफ़ी नहीं। ज़्यादा ख़तरे वालों के लिए, जैसे शुगर, दिल की बीमारी, बहुत ज़्यादा LDL या बढ़े लंबे ख़तरे वाले, दिशानिर्देश जीवनशैली के साथ स्टैटिन जैसी दवा सुझाते हैं, और इसकी ज़रूरत होना मेहनत की हार नहीं।
आप क्या कर सकते हैं
- लगभग रोज़ हिलें-डुलें और लंबे समय तक बैठना तोड़ें; अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन हफ़्ते में कम से कम 150 मिनट मध्यम गतिविधि, जैसे पांच दिन 30 मिनट की तेज़ सैर, सुझाता है।
- खाना सब्ज़ी, फल, दाल, मोटे अनाज और अच्छी वसा पर बनाएं, और तली चीज़ें, वनस्पति तथा फैटी-प्रोसेस्ड मांस जैसी सैचुरेटेड और ट्रांस फैट घटाएं।
- तंबाकू छोड़ें और ज़रूरत पर वज़न संभालें।
- अपना कोलेस्ट्रॉल और दिल का कुल ख़तरा जांचें, और अपने नंबर जानें।
- स्टैटिन मिले तो जैसे कही गई वैसे लें, और अच्छे नंबर देखकर बंद न करें।
ज़रूरी बात: चलना और खान-पान मदद करते हैं, पर कोलेस्ट्रॉल या दिल का ख़तरा ज़्यादा हो तो ये अक्सर अकेले काफ़ी नहीं, और दवा की ज़रूरत हो सकती है। सिर्फ़ डॉक्टर ख़तरा आंककर तय कर सकता है; यह लेख जानकारी है, डॉक्टर से मिलने की जगह नहीं।