रिपोर्ट में एक नंबर पूरे हफ़्ते की नींद उड़ा देता है। HbA1c थोड़ा ज़्यादा, और लोग तुरंत डायबिटीज़ ठीक करने वाले नुस्खे ढूंढने लगते हैं। घबराने से पहले एक बात समझिए। प्री-डायबिटीज़ गाड़ी के डैशबोर्ड की चेतावनी वाली बत्ती है, और बत्ती इसलिए जलती है कि आप समय रहते कुछ कर सकें।
प्री-डायबिटीज़ का मतलब है कि खून में शुगर सामान्य से ज़्यादा है पर डायबिटीज़ की सीमा से कम। डॉक्टर इसे फ़ास्टिंग शुगर, HbA1c या ग्लूकोज़ टेस्ट से देख सकते हैं। किसी कैंप या घर की मशीन का एक नंबर काफ़ी नहीं है। इसे डॉक्टर को दिखाएं।
हां, प्री-डायबिटीज़ से आगे चलकर डायबिटीज़ का ख़तरा बढ़ता है। पर यह तय नहीं है। WHO साफ़ कहता है कि नियमित व्यायाम, अच्छे खान-पान, वज़न संभालने और तंबाकू से दूरी से टाइप 2 डायबिटीज़ अक्सर रोकी या टाली जा सकती है।
अच्छी योजना आपकी रोज़ की दिनचर्या से शुरू होती है। आते-जाते फल या भुना चना साथ रखें। खाने में सब्ज़ी और दाल बढ़ाएं। थोड़ा पैदल चलें। दोबारा टेस्ट कराएं। बीपी, कोलेस्ट्रॉल और परिवार का इतिहास भी जांचें।
खाने की सलाह आपके पैसे और रोज़ की ज़िंदगी के हिसाब से होनी चाहिए। दाल, चना, राजमा, सब्ज़ी, दही, अंडा, मछली, मोटे अनाज और मौसमी फल सब काम आते हैं। कोई डिटॉक्स ड्रिंक, कोई एक बीज या बहुत सख़्त डाइट प्री-डायबिटीज़ को ठीक नहीं करती।
कुछ लोगों का ख़तरा ज़्यादा होता है और उन्हें दवा भी चाहिए हो सकती है। यह डॉक्टर का फ़ैसला है। बहुत प्यास लगना, बार-बार पेशाब, बिना वजह वज़न घटना या धुंधला दिखना दिखे तो तुरंत जांच कराएं।
प्री-डायबिटीज़ का असली राज़ यह है कि रोज़ की छोटी आदतें उन बड़ी योजनाओं से बेहतर हैं जो चार दिन में छूट जाती हैं। और अगर समय, पैसे या चलने की जगह की दिक्कत है, तो डॉक्टर को बताएं।