एक ऑनलाइन विज्ञापन पेन की परफ़ेक्ट तस्वीर, आधा दाम, घर पहुंच और बिना पर्ची दिखाता है, ताकि आप सोचने से पहले ख़रीद लें। पर एक बात याद रखें, तस्वीर से यह पता नहीं चलता कि अंदर क्या है, और इन दवाओं को सुरक्षित बनाना बहुत मुश्किल है। इनका असली तत्व एक पेप्टाइड है, जिसे कंपनियां सख़्त मानकों के तहत बनाती और साफ़ करती हैं, और हर बैच की पहचान, मात्रा तथा मिलावट की जांच के बाद ही साफ़ पेन में भरती हैं।
तापमान इस कहानी का छुपा ख़तरा है। ये दवाएं ज़्यादा गर्मी, जमने या ग़लत भंडारण से बिना किसी संकेत के ख़राब हो सकती हैं, इसीलिए भरोसेमंद कंपनियां कोल्ड चेन से इन्हें कारख़ाने से दुकान तक एक तय ठंडे तापमान में रखती हैं, जो सस्ता विक्रेता न दे सकता है न साबित कर सकता है।
यहीं छूट ख़तरनाक बन जाती है, क्योंकि कमी की जगह में नकली माल घुस आया है और भारत में नकली पेन ज़ब्त हो चुके हैं। WHO ने ख़ास चेताया है कि इन दवाओं की मांग नकली और घटिया उत्पाद बढ़ा रही है, जिनमें ग़लत खुराक, दूसरी दवा या कुछ भी न होना हो सकता है, और यह असली इलाज में देरी करा देता है।
नकली से कैसे बचें
- सिर्फ़ लाइसेंस वाली फ़ार्मेसी या डॉक्टर की पर्ची से, और सिर्फ़ कंपनी के अधिकृत स्टॉकिस्ट से ख़रीदें।
- बहुत सस्ते ऑफ़र पर शक करें, क्योंकि MRP से क़रीब 25 से 30 प्रतिशत नीचे की छूट या "बिना पर्ची" वाले ऑफ़र ख़तरे के संकेत हैं।
- इम्पोर्टेड या हॉस्पिटल क्वालिटी जैसे शब्दों को विज्ञापन मानें, और देखें कि पैक पर असली कंपनी का नाम है।
- डिब्बा फटा हो, लेबल ग़लत लगे या भंडारण का पता न हो तो पेन इस्तेमाल न करें, और कभी साझा न करें।
- शक हो तो इस्तेमाल से पहले फ़ार्मासिस्ट से पुष्टि कराएं।
ज़रूरी बात: नकली पेन में ग़लत खुराक, दूसरी दवा या कुछ भी न होना हो सकता है। असली दवा की क़ीमत उसकी जांच, साफ़ निर्माण और भरोसेमंद कोल्ड चेन में है।