हर परिवार में एक मशहूर खर्राटे वाला होता है, जिसकी आवाज़ दीवार पार कर जाती है और नाश्ते पर मज़ाक बन जाती है। खर्राटे इतने आम हैं कि हम इन्हें अनसुना कर देते हैं। पर कभी-कभी इस मज़ाक के पीछे एक असली बीमारी छिपी होती है, और उसका पता खर्राटे से नहीं, बल्कि बीच-बीच की ख़ामोशी से चलता है। सांस का रुकना, हांफना, और अगले दिन की भारी थकान।
स्लीप एपनिया में सोते समय सांस की नली बार-बार सिकुड़ या बंद हो जाती है। शरीर हर बार थोड़ा जागकर सांस दोबारा शुरू करता है, अक्सर इंसान को पता भी नहीं चलता। नींद टुकड़ों में बंट जाती है और ख़ून में ऑक्सीजन ऊपर-नीचे होती रहती है। आप आठ घंटे बिस्तर पर रहकर भी ऐसे उठते हैं जैसे सोए ही न हों।
लक्षण जानना ज़रूरी है, क्योंकि सबसे साफ़ लक्षण अक्सर साथ सोने वाला देखता है। तेज़ खर्राटे, सांस रुकना, हांफना, सूखे मुंह या सिरदर्द के साथ जागना, दिन में बहुत नींद आना, ध्यान न लगना और चिड़चिड़ापन। यह महिलाओं और बच्चों में भी होता है।
वज़न ज़्यादा होना, हाई बीपी, शुगर, सोने से पहले शराब और जबड़े की बनावट से ख़तरा बढ़ता है। एक साफ़ बात, किसी ऐप, स्मार्टवॉच या खर्राटे की रिकॉर्डिंग से स्लीप एपनिया की पहचान नहीं हो सकती।
इलाज कारण और गंभीरता पर निर्भर है। इसमें वज़न संभालना, सोने की मुद्रा की सलाह, दांतों का उपकरण, या CPAP मशीन शामिल हो सकती है, जो हवा के हल्के दबाव से सांस की नली खुली रखती है। दुकान से मिलने वाले खर्राटे रोकने के उपकरण असली जांच की जगह नहीं ले सकते।
सुरक्षा को गंभीरता से लें। अगर गाड़ी चलाते या मशीन पर काम करते समय नींद रोकना मुश्किल हो, तो जल्दी मदद लें। शराब और नींद की गोलियां कुछ लोगों में सांस और बिगाड़ सकती हैं। बच्चा तेज़ खर्राटे लेता हो, मुंह से सांस लेता हो या ध्यान की दिक्कत हो, तो बच्चों के डॉक्टर को दिखाएं।