जिम में डिब्बों की भरमार आपसे बात करने लगती है। एक रील कहती है प्रोटीन पाउडर ज़रूरी है, दूसरी कहती है क्रिएटिन ख़तरनाक है, और सच वहीं है जहां विज्ञान, विज्ञापन और चिंता टकराते हैं।
प्रोटीन मांसपेशियों की मरम्मत के लिए ज़रूरी है, और कसरत करने वालों को थोड़ा ज़्यादा चाहिए हो सकता है, पर मात्रा शरीर और खान-पान पर निर्भर है। कई लोग दाल, चना, राजमा, सोया, दूध, दही, पनीर, अंडा, मछली और चिकन से ज़रूरत पूरी कर लेते हैं। पाउडर आसान रूप में खाना है, ज़रूरी नहीं।
क्रिएटिन मोनोहाइड्रेट सबसे ज़्यादा जांचे गए सप्लीमेंट में है। International Society of Sports Nutrition इसे वज़न उठाने जैसी छोटी, तेज़ ताक़त वाली कसरत के लिए सही मानता है, और बताता है कि इससे वज़न थोड़ा बढ़ सकता है क्योंकि मांसपेशियां पानी रोकती हैं, जो चर्बी नहीं है। गुर्दे की बीमारी, गर्भ या नियमित दवा वाले पहले डॉक्टर से पूछें।
गुणवत्ता मायने रखती है, क्योंकि सप्लीमेंट में मिलावट या ग़लत लेबल हो सकता है, ख़ासकर टेस्टोस्टेरोन बूस्टर या फैट बर्नर में। US NIH की सलाह है कि भरोसेमंद कंपनी चुनें, लेबल पढ़ें और अनजान जगह से खुला पाउडर न लें।
प्रोटीन वाले नाश्ते से शुरू करें, कसरत के बाद दही या दूध लें, और भरोसेमंद पाउडर तभी लें जब खाना मुश्किल हो, क्रिएटिन का फ़ैसला डॉक्टर से इतिहास पर बात करके करें। तेज़ बदलाव को सेहत मान लेने वाली सलाह से बचें।